F:- ओ माँ तू तो जाने व्यथा मन की
अँखियाँ जो छुप छुप रोई तुझसे छुपी न कोई
हरी तूने हर पीड़ा दुखियन की
कोरस:- ओ माँ तू तो जाने व्यथा मन की
अँखियाँ जो छुप छुप रोई तुझसे छुपी न कोई
हरी तूने हर पीड़ा दुखियन की
F:- ओ माँ
F:- पर्वत त्रिकूटपे चढके कन्या का रूप धरके तुमने बसाया वैष्णोधाम -2
सुनली तूने सदा श्रीधर की देके उसे सहारा,
करवाके फिर भंडारा भरी ,झोली तूने एक निर्धन की
कोरस:- ओ मां
F:- भैरव ने तुझसे माँगा ,मांस मदिरा प्याला अहंकार तूने ही तोडा -2
भैरो घाटी गिरा सर कट के मांगी क्षमा जो उसने
करके दया फिर तुमने लाज रखली उसके असुवन की
कोरस:- ओ माँ तू तो जाने व्यथा मन की
अँखियाँ जो छुप छुप रोई तुझसे छुपी न कोई
हरी तूने हर पीड़ा दुखियन की ओ माँ
कृष्णा हिंदू धर्म में एक प्रमुख देवता है। उन्हें विष्णु के आठवें अवतार के रूप में और अपने आप में सर्वोच्च भगवान के रूप में भी पूजा जाता है।
Copyright 2024-25 Bhakti Darshan . All rights reserved - Design & Developed by BD